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“Bacchon ko chhoti age se business thinking sikhana zaruri kyun hai?
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“Bacchon ko chhoti age se business thinking sikhana zaruri kyun hai?

बच्चों को छोटी उम्र से बिजनेस थिंकिंग सिखाना क्यों जरूरी है?

मेरा मानना है कि आज के दौर में बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान देना काफी नहीं है। हमें उन्हें ऐसी स्किल्स सिखानी होंगी जो उन्हें भविष्य में एक आत्मनिर्भर और सशक्त इंसान बनाएं। इसके लिए entrepreneurship की समझ को छोटी उम्र से ही विकसित करना बहुत जरूरी है। जब मैंने The Base Neo School, Haldwani, Uttarakhand में बच्चों के लिए JEP अप्रोच शुरू किया, तो मेरा यही सपना था कि हर बच्चा न सिर्फ नौकरी तलाशने वाला, बल्कि नौकरियां देने वाला बने। हमारी टैगलाइन "Entrepreneurship Starts at 3, Not at 30!" इसी सोच को दर्शाती है।

आज मैं आपके साथ इस बात पर चर्चा करना चाहता हूं कि बच्चों को छोटी उम्र से business thinking सिखाना क्यों जरूरी है और यह उनके भविष्य को कैसे संवार सकता है।

1. बच्चों का दिमाग होता है सबसे ग्रहणशील

यह एक साइंटिफिक तथ्य है कि बच्चों का brain development 90% तक 5 साल की उम्र तक पूरा हो जाता है। इस दौरान जो कुछ भी वे सीखते हैं, वह उनके दिमाग पर गहरा असर छोड़ता है। अगर हम इस उम्र में उन्हें problem-solving, creativity, और financial literacy की बुनियाद देते हैं, तो यह उनके सोचने का तरीका हमेशा के लिए बदल सकता है।

मैंने अक्सर देखा है कि बच्चे कितनी naturally नई चीजें सीख लेते हैं। अगर हम उन्हें business thinking के कॉन्सेप्ट्स को खेल-खेल में सिखाएं, तो वे इसे आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। मिसाल के तौर पर, हमारे स्कूल में JEP के तहत हम बच्चों को साधारण गणित को business calculations से जोड़कर सिखाते हैं। इससे वे न सिर्फ नंबर समझते हैं, बल्कि यह भी सीखते हैं कि इनका इस्तेमाल असल जिंदगी में कैसे करना है।

2. आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना विकसित करना

जब बच्चे छोटी उम्र से entrepreneurial mindset के साथ सोचना शुरू करते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास और leadership qualities अपने आप विकसित होने लगती हैं। मैंने The Base Neo School में देखा है कि जब बच्चे अपने छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स बनाते हैं, जैसे कि एक काल्पनिक दुकान चलाना या किसी प्रॉब्लम का हल ढूंढना, तो वे अपनी राय रखने में हिचकिचाते नहीं हैं।

यह आत्मविश्वास उन्हें भविष्य में बड़े फैसले लेने के लिए तैयार करता है। हमारा मकसद है कि हर बच्चा एक confident leader बने, जो न सिर्फ अपनी जिंदगी को संवारे, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बने।

3. असल जिंदगी की चुनौतियों के लिए तैयार करना

आज की दुनिया में प्रतियोगिता बहुत ज्यादा है। अगर बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाएगा, तो वे असल जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने में पीछे रह सकते हैं। Business thinking सिखाने का मतलब है कि हम उन्हें risk-taking, decision-making, और resource management जैसे स्किल्स सिखाएं।

मैं अक्सर माता-पिता से कहता हूं कि हमें बच्चों को गलतियां करने का मौका देना चाहिए। गलतियों से ही वे सीखते हैं। हमारे JEP अप्रोच में हम बच्चों को ऐसी गतिविधियां देते हैं, जहां वे खुद से सोचें, प्लान करें, और फिर अपने फैसलों के नतीजे देखें। इससे वे यह समझते हैं कि हर फैसले की जिम्मेदारी भी उनकी ही है।

4. भविष्य के लिए एक नया नजरिया

मेरा सपना है कि हमारे देश का हर बच्चा भविष्य में एक job creator बने, न कि job seeker। इसके लिए जरूरी है कि हम उन्हें छोटी उम्र से ही innovative thinking सिखाएं। St. Lawrence Sr. Sec. School की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हमने The Base Neo School में यह तय किया है कि हर बच्चे को entrepreneurship का ऐसा माहौल दिया जाए, जहां वे अपनी creativity को खुलकर व्यक्त कर सकें।

हमारे स्कूल में Pre-Primary से लेकर Class VI तक के बच्चों को हर सब्जेक्ट entrepreneurship के नजरिए से पढ़ाया जाता है। मिसाल के तौर पर, अगर हम इतिहास पढ़ा रहे हैं, तो हम बच्चों को यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि उस समय के लोग अपनी समस्याओं को कैसे हल करते थे। इससे बच्चों में analytical thinking विकसित होती है।

माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका

मैं सभी माता-पिता और शिक्षकों से कहना चाहूंगा कि बच्चों को business thinking सिखाने की जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की नहीं है। घर पर भी हमें बच्चों को छोटे-छोटे कामों में शामिल करना चाहिए। जैसे कि उन्हें घर का बजट समझाना, या बाजार से सामान खरीदने में उनकी राय लेना। इससे वे financial concepts को समझने लगते हैं।

  • बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दें, जैसे कि घर के खर्चों में मदद करना।
  • उनके साथ problem-solving गेम्स खेलें, जो उनकी सोच को तेज करें।
  • उनकी creativity को प्रोत्साहित करें, भले ही उनकी योजनाएं कितनी भी अजीब लगें।

अंत में

मैं यह मानता हूं कि हर बच्चे में एक entrepreneur छुपा होता है। हमें बस उसे सही माहौल और मौके देने की जरूरत है। The Base Neo School में हम यही कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को छोटी उम्र से ही ऐसी शिक्षा दी जाए, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करे। हमारा JEP अप्रोच इसी दिशा में एक कदम है।

मेरा विश्वास है कि अगर हम बच्चों को सही दिशा दें, तो वे न सिर्फ अपनी जिंदगी को बेहतर बनाएंगे, बल्कि हमारे देश को भी आगे ले जाएंगे।

तो आइए, हम सब मिलकर बच्चों को एक ऐसा भविष्य दें, जहां वे अपनी dreams को सच कर सकें। अगर आप भी अपने बच्चे के लिए ऐसा माहौल चाहते हैं, तो हमें जरूर संपर्क करें। हमारा मकसद एक साथ मिलकर अगली पीढ़ी को सशक्त बनाना है।

Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
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