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Chapter 2: Reality Check
Real examples (students, parents, stress, lack of skills)
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Chapter 2: Reality Check Real examples (students, parents, stress, lack of skills)

Chapter 2: Reality Check

अध्याय 2: रियलिटी चेक

मैं अक्सर सोचता हूँ कि हम अपने बच्चों को कितना समझ पाते हैं। हम उन्हें किताबी ज्ञान तो दे देते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें वो skills दे पा रहे हैं, जो असल जिंदगी में काम आएँ? आज मैं आपसे कुछ ऐसी सच्ची कहानियाँ साझा करना चाहता हूँ, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हमारी शिक्षा प्रणाली में क्या कमी है और क्यों हमें एक नया नजरिया अपनाने की जरूरत है।

बच्चों पर बढ़ता तनाव

पिछले कुछ सालों में मैंने देखा है कि बच्चे बहुत छोटी उम्र से ही stress में आ रहे हैं। कुछ समय पहले एक माता-पिता मेरे पास आए थे। उनकी बेटी, जो सिर्फ कक्षा 5 में थी, रात-रात भर जागकर पढ़ाई करती थी, क्योंकि उसे डर था कि अगर marks कम आए, तो उसकी teacher और parents नाराज होंगे। मैंने उस बच्ची से बात की, और मुझे एहसास हुआ कि वो अपनी creativity या curiosity को explore करने के बजाय सिर्फ रट्टा मारने में लगी थी। क्या यही हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सिर्फ marks के पीछे भागें?

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है। मैंने कई बच्चों को देखा है, जो exams के डर से अपनी नींद और सेहत खराब कर रहे हैं। हमारा सिस्टम उन्हें problem-solving या decision-making सिखाने के बजाय सिर्फ competition में धकेल रहा है।

skills की कमी: एक कड़वी सच्चाई

मैंने हाल ही में एक ऐसे छात्र से मुलाकात की, जो अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी कर चुका था। वो बहुत मेहनती था, लेकिन जब उससे basic financial literacy के बारे में पूछा गया, तो वो चुप हो गया। उसे यह नहीं पता था कि budget कैसे बनाया जाता है या saving क्यों जरूरी है। मैंने सोचा, अगर हम बच्चों को इतनी बुनियादी चीजें नहीं सिखा रहे, तो हम उन्हें भविष्य के लिए कैसे तैयार कर रहे हैं?

आज के समय में entrepreneurship, critical thinking, और communication जैसी skills बहुत जरूरी हैं। लेकिन हमारा पारंपरिक सिस्टम इन पर ध्यान नहीं देता। मैंने कई parents से सुना है कि उनके बच्चे स्कूल से तो पास हो गए, लेकिन real-world challenges का सामना करने में असमर्थ हैं। यह एक reality check है कि हमें अपनी सोच बदलनी होगी।

parents की चिंताएँ

मैं हर दिन माता-पिता से मिलता हूँ, जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। एक माँ ने मुझसे कहा कि उनका बेटा बहुत creative है, लेकिन स्कूल में उसे सिर्फ theory पढ़ाई जा रही है। वो चाहती थीं कि उनका बच्चा अपनी imagination को इस्तेमाल करे, लेकिन सिस्टम में इसके लिए कोई जगह नहीं थी। मैंने उनसे कहा कि हम The Base Neo School में इसी कमी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा JEP approach हर subject को entrepreneurship के angle से जोड़ता है, ताकि बच्चे न सिर्फ पढ़ें, बल्कि सोचें और apply भी करें।

एक और पिता ने बताया कि उनका बच्चा group activities में हिस्सा नहीं लेता, क्योंकि उसे confidence की कमी है। मैंने उनसे कहा कि leadership और teamwork जैसी skills को छोटी उम्र से ही develop करना जरूरी है। अगर हम बच्चों को सही माहौल दें, तो वो naturally इन qualities को सीख सकते हैं।

क्या है समाधान?

मेरा मानना है कि हमें बच्चों को एक ऐसा environment देना होगा, जहाँ वो बिना डर के fail हो सकें और उससे सीख सकें। The Base Neo School में हम यही करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा vision है कि हर बच्चा एक confident leader बने और entrepreneurial mindset के साथ बड़ा हो। हमारी tagline, "Entrepreneurship Starts at 3, Not at 30!", इसी सोच को दर्शाती है।

  • हम JEP के जरिए mathematics को business calculations से जोड़ते हैं।
  • हम science को innovation और experiments के साथ पढ़ाते हैं।
  • हम language को storytelling और communication skills से जोड़ते हैं।

यह सब इसलिए, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि हमारे बच्चे सिर्फ किताबी कीड़े न बनें, बल्कि real-world problems को solve करने वाले thinkers बनें।

"If we don't teach our kids to think like entrepreneurs, we are preparing them for a world that no longer exists."

आगे का रास्ता

मैं समझता हूँ कि यह बदलाव आसान नहीं है। लेकिन अगर हम अभी नहीं जागे, तो हमारे बच्चे भविष्य में struggle करेंगे। St. Lawrence Sr. Sec. School की legacy को आगे बढ़ाते हुए, हमने The Base Neo School, Haldwani, Uttarakhand में एक नया सपना देखा है। हम चाहते हैं कि Pre-Primary से Class VI तक के बच्चे यहाँ आकर न सिर्फ पढ़ाई करें, बल्कि जिंदगी जीना सीखें।

मैं आपसे, एक माता-पिता और educator के रूप में, यह अपील करता हूँ कि हम मिलकर अपने बच्चों के लिए एक बेहतर सिस्टम बनाएँ। हमें उनकी creativity को दबाना नहीं, बल्कि उसे पंख देना है। हमें उनका stress कम करना है और उनकी curiosity को बढ़ाना है। आइए, साथ मिलकर यह reality check को एक reality change में बदल दें।

मैं आपकी राय सुनना चाहता हूँ। क्या आप भी अपने बच्चों के लिए एक ऐसे स्कूल की तलाश में हैं, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करे? हमें बताएँ, क्योंकि हमारा मिशन तभी सफल होगा, जब हम सब एक साथ होंगे।

Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
The Base Neo School

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