The Base Neo School | Entrepreneurship Starts at 3
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🔹 Chapter 5: 30% Academics
Practical learning
Concept-based teaching
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🔹 Chapter 5: 30% Academics Practical learning Concept-based teaching JEP integration

30% एकेडमिक्स: प्रैक्टिकल लर्निंग और कॉन्सेप्ट-बेस्ड टीचिंग की ताकत

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चे जब स्कूल आते हैं, तो उनका दिमाग एक खाली स्लेट की तरह होता है, जिस पर हम जो लिखते हैं, वही उनका भविष्य बनता है। The Base Neo School, हल्द्वानी, उत्तराखंड में हमने एक ऐसा सिस्टम बनाया है, जहां एकेडमिक्स सिर्फ 30% है, बाकी 70% है प्रैक्टिकल लर्निंग, creativity, और entrepreneurship का विकास। आज मैं आपसे इस दृष्टिकोण के बारे में बात करना चाहता हूं, खासकर JEP के इंटीग्रेशन और concept-based teaching के महत्व पर।

एकेडमिक्स क्यों सिर्फ 30%?

जब मैंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा, तो मैंने देखा कि पारंपरिक सिस्टम में बच्चे रटने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन क्या रटना ही शिक्षा है? मेरा मानना है कि नहीं। शिक्षा का असली मतलब है समझना, लागू करना, और जीवन में उसका उपयोग करना। इसलिए हमने तय किया कि एकेडमिक्स को सिर्फ 30% रखा जाए, ताकि बच्चे किताबी ज्ञान से ज्यादा real-world skills सीखें।

हमारे स्कूल में, जो बच्चे Pre-Primary से लेकर Class VI तक पढ़ते हैं, उनके लिए हमने एक ऐसा माहौल बनाया है, जहां वे किताबों से ज्यादा अनुभव से सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर हम गणित पढ़ा रहे हैं, तो केवल फॉर्मूले नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें business calculations के साथ जोड़ते हैं। बच्चा यह समझता है कि नंबर सिर्फ पेपर पर नहीं, बल्कि बाजार में, दुकान में, और जीवन में कैसे काम आते हैं।

प्रैक्टिकल लर्निंग: अनुभव से सीखना

मुझे याद है जब मैंने पहली बार अपने स्कूल में एक छोटा सा mock market बनाया था। बच्चों को नकली पैसे दिए गए और उन्हें खरीद-बिक्री का खेल खेलने को कहा गया। आप यकीन नहीं करेंगे, कितने छोटे-छोटे बच्चे इतनी समझदारी से सौदेबाजी करने लगे! एक 5 साल का बच्चा मुझे समझा रहा था कि उसे क्यों एक चीज सस्ते में खरीदनी चाहिए। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि प्रैक्टिकल लर्निंग कितनी गहरी छाप छोड़ती है।

हमारे JEP दृष्टिकोण में हर सब्जेक्ट को entrepreneurship के नजरिए से पढ़ाया जाता है। चाहे वह साइंस हो, हिस्ट्री हो, या अंग्रेजी, हम बच्चे को यह सिखाते हैं कि इस ज्ञान को वह अपने जीवन में कैसे लागू कर सकता है। प्रैक्टिकल लर्निंग का मतलब है कि बच्चा सिर्फ पढ़े नहीं, बल्कि करे, गलतियां करे, और उनसे सीखे।

कॉन्सेप्ट-बेस्ड टीचिंग: समझ का आधार

मेरा यह विश्वास है कि अगर बच्चे को किसी चीज की बुनियाद समझ आ जाए, तो वह उसे कभी नहीं भूलता। हमारी concept-based teaching इसी सिद्धांत पर काम करती है। हम रटने के बजाय बच्चों को हर चीज का why और how समझाते हैं। जैसे कि अगर हम पानी के चक्र के बारे में पढ़ा रहे हैं, तो सिर्फ डायग्राम नहीं दिखाते, बल्कि बच्चों को बाहर ले जाकर बारिश, नदी, और वाष्पीकरण को महसूस करवाते हैं।

इस तरह की टीचिंग से बच्चे का curiosity बढ़ता है। वह सवाल पूछता है, जवाब ढूंढता है, और खुद से सोचता है। हमारा मकसद है कि हर बच्चा एक thinker बने, न कि सिर्फ एक followerThe Base Neo School में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे का brain development सही दिशा में हो, क्योंकि 90% दिमागी विकास तो 5 साल की उम्र तक ही हो जाता है।

JEP इंटीग्रेशन: हर सब्जेक्ट में उद्यमिता

जब हमने JEP को अपने स्कूल का आधार बनाया, तो हमारा लक्ष्य था कि हर बच्चे में एक entrepreneurial mindset विकसित हो। हमारा नारा है - "Entrepreneurship Starts at 3, Not at 30!" और इसे हम हर कक्षा, हर गतिविधि में लागू करते हैं। JEP का मतलब है कि हर सब्जेक्ट को इस तरह से पढ़ाया जाए कि बच्चा उसमें से problem-solving और innovation सीखे।

  • उदाहरण के लिए, अगर हम हिस्ट्री पढ़ा रहे हैं, तो बच्चे को सिर्फ राजा-महाराजाओं की कहानियां नहीं सुनाई जातीं, बल्कि यह समझाया जाता है कि उस समय की economy कैसे काम करती थी।
  • साइंस में हम सिर्फ थ्योरी नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों को छोटे-छोटे experiments करने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वे खुद से innovate करें।
  • अंग्रेजी में हम उन्हें communication skills सिखाते हैं, ताकि वे अपनी बात को आत्मविश्वास से रख सकें।

मुझे गर्व है कि St. Lawrence Sr. Sec. School की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हमने The Base Neo School में एक ऐसा मंच तैयार किया है, जहां बच्चे न केवल पढ़ते हैं, बल्कि अपने भविष्य को खुद गढ़ते हैं।

"If we teach children to think like entrepreneurs from the age of 3, imagine the kind of leaders they will become by 30!"

माता-पिता और शिक्षकों से मेरा अनुरोध

मैं सभी माता-पिता और शिक्षकों से कहना चाहता हूं कि बच्चों को सिर्फ मार्क्स के पीछे न दौड़ाएं। उनके अंदर की creativity, curiosity, और confidence को पहचानें। हमारा स्कूल इस बात पर जोर देता है कि हर बच्चा अलग है, और हर बच्चे में कुछ खास है। हमें सिर्फ उसे खोजने और निखारने की जरूरत है।

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक confident leader बने, जो न केवल नौकरी ढूंढे बल्कि नौकरियां दे, तो हमें मिलकर काम करना होगा। The Base Neo School में हम हर कदम पर आपके साथ हैं। आइए, हम बच्चों के भविष्य को एक नई दिशा दें, जहां वे सिर्फ सपने न देखें, बल्कि उन्हें पूरा भी करें।

मेरा सपना है कि हर बच्चा, चाहे वह 3 साल का हो या 12 साल का, अपने अंदर छुपे entrepreneur को पहचाने। हमारा JEP दृष्टिकोण, प्रैक्टिकल लर्निंग, और concept-based teaching इसी सपने को साकार करने के लिए हैं। आइए, मिलकर एक ऐसी पीढ़ी तैयार करें, जो दुनिया को बदल दे।

Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
Mr. Anil Joshi, Chairman - St. Lawrence & The Base Neo School
The Base Neo School

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